मैंने फिर एक नई दुनिया और इसके नियम बना लिए हैं ।
मगर एक बार फिर तम्हें यह एह्शास नहीं होगा की '
नियम कब के बदल गए ।
इस दुनिया के लिए मैंने फिर से दो चार शर्तें तैयार कर ली हैं ,
मगर तुम्हे यह एह्शास नहीं होगा ,
ऐ शर्तें तुम्हारी किस मजबूरी की नुमाइंदगी करती हैं ।
मैं एक बार फिर नई दुनिया के तलाश में हूँ
सोमवार, 14 दिसंबर 2009
रविवार, 13 दिसंबर 2009
कोपेनहेगेन कितने ?
तुम फिर वही तलाश करोगे
तुम फिर वहीं खोजाओगे
जहाँ मेरी राहें सुरु होती हैं
जहाँ मेरी तलाश खत्म होती है
मगर मेरी राह तुम्हारे खोने से
सानदार नहीं होगी
मेरी तलाश वैसी नहीं होगी
जैसे की तुम्हारी
मगर यह भी सच है की तुम फिर कोशिस
कर के भी तलाश पुरी नहीं कर पाओगे
फिर भी तुम सभ्यता के चरम हो
तुम विज्ञानं के पंख के
तीव्र चालक हो इतना होकर भी
तुम्हारे पास तुम्हारे अस्तित्व के
प्रश्न का उत्तर नहीं है
तुम शायद अपने स्वार्थ में अपनी मंजिल
फिर खो दोगे
क्योंकि तुम अपनी महान पतित सभ्यता के
दम्भी संतरी भी हो .
तुम फिर वहीं खोजाओगे
जहाँ मेरी राहें सुरु होती हैं
जहाँ मेरी तलाश खत्म होती है
मगर मेरी राह तुम्हारे खोने से
सानदार नहीं होगी
मेरी तलाश वैसी नहीं होगी
जैसे की तुम्हारी
मगर यह भी सच है की तुम फिर कोशिस
कर के भी तलाश पुरी नहीं कर पाओगे
फिर भी तुम सभ्यता के चरम हो
तुम विज्ञानं के पंख के
तीव्र चालक हो इतना होकर भी
तुम्हारे पास तुम्हारे अस्तित्व के
प्रश्न का उत्तर नहीं है
तुम शायद अपने स्वार्थ में अपनी मंजिल
फिर खो दोगे
क्योंकि तुम अपनी महान पतित सभ्यता के
दम्भी संतरी भी हो .
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